नोएडा में यातायात का अलख जगाने वाले ट्रैफिक बाबा नहीं रहे

नोएडा में यातायात का अलख जगाने वाले ट्रैफिक बाबा नहीं रहे

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दिल्ली-नोएडा के लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए जागरूक करने वाले ट्रैफिक बाबा के नाम से मशहूर मुकुल चंद्र जोशी नहीं रहे। ट्रैफिक बाबा ने जिस तरह की सेहतमंद जिंदगी जी उसी तरह उनका निधन भी हुआ। नोएडा के वाहन चालकों को 14 साल से यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने वाले सेक्टर-21 स्थित जलवायु विहार में मुकुल चंद्र जोशी पत्नी शोभा जोशी के साथ रहते थे। 83 साल जोशी के दो बेटे हैं। रविवार सुबह वह रोजाना की तरह सुबह सैर करने गए थे। परिजनों ने बताया कि करीब साढ़े नौ बजे वापस घर आने पर उन्होंने पत्नी से नहाने के लिए पानी गर्म करने को कहा। पानी गर्म होने तक वह सोने चले गए। करीब आधा घंटे बाद पत्नी ने उन्हें नहाने के लिए उठाया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उनको पास में ही स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

1973 में वायु सेना से रिटायर हुए थे मुकुल चंद्र जोशी

बताया जाता है कि करीब 17 साल पहले उनके पेस मेकर डले थे। उनके छोटे बेटे की बहू रचना जोशी ने बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के गल्ली मोहल्ला निवासी मुकुल चंद्र जोशी वर्ष 1973 में वायु सेना से रिटायर हुए थे। 1995 में वह नोएडा आ गए थे। इनके दो बेटे हैं। बड़े बेटे 51 वर्षीय नीरज जोशी सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में हैं, जबकि दूसरे बेटे 46 वर्षीय राजीव जोशी एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन हैं। यह बंगलुरू में कार्यरत हैं। नोएडा के लोग इन्हें ट्रैफिक बाबा के नाम से जानते थे।

रोजाना 250 लोगों को बांटते थे पर्चे

जोशी के एक खास दोस्त के बेटे की 2003 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह उनका इकलौता बेटा था। मुकुल को इस हादसे में पता चला कि उसने हेलमेट नहीं लगा रखा था। बेटे की मौत के बाद उसके पिता बुरी तरह टूट गए थे। दोस्त का बुरा हाल देख मुकुल जोशी ने उस दिन से लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। इसके बाद वह रोजाना 250 लोगों को पर्चे बांट नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करते थे। अपने खर्चे पर नोएडा के अलग-अलग स्थानों के अलावा बंगलुरू में भी जागरूकता फैलाते थे।

9 सितंबर को एडीजी ने किया था सम्मानित

पुलिस प्रशासन की ओर से 9 सितंबर को गरूड व शक्ति सेवा शुरू की गई थी। इस दिन एडीजी ने मुकुल चंद्र जोशी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया था। इससे पहले भी कई पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया। लोगों को जागरूक करने के लिए पुलिस प्रशासन इनकी मदद लेता था।

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