“सैल्यूट” का अलग है तरीका और मतलब देश की तीनों सेनाओं के लिए

“सैल्यूट” का अलग है तरीका और मतलब देश की तीनों सेनाओं के लिए

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देश की तीनों सेनाओं

The Police News

लखनऊ।  किसी को सम्मान देने का सबका अलग तरीका होता है। हर कोई अपने हिसाब से लोगों को सम्मान देता है। लेकिन क्या आपको पता है कि “सैल्यूट” करने का सिविल पुलिस का तरीका अलग होता है तो देश की तीनों सेनाओं यानी जलसेना, थलसेना, और वायुसेना के अभिवादन या सलाम करने का तरीका भी अलग होता है। आज हम आपको सेना के इन्हीं अलग-अलग “सैल्यूट” से रुबरु कराएंगे।

आर्मी ऐसे करती है सैल्यूट

आर्मी जब किसी को सलामी देती है तो उनका हाथ उस व्यक्ति की तरफ होता है जिसको सलामी दी जाती है। इस तरह से सलामी देकर आर्मी दर्शात है कि उनके पास इस समय कोई हथियार नहीं है और हर कोई उनपर विश्वास कर सकता है।

इंडियन नेवी के सैल्यूट में बनता 90 डिग्री का कोण

इंडियन नेवी का सैल्यूट करने का तरीका सबसे अलग होता है। इंडियन नेवी जब सैल्यूट करत है तो उनके हाथों क हथेली और ज़मीन के बच 90 डिग्री का कोण बनता है। ऐसा माना जाता है कि पुराने समय में नेवी के सिपाही सारा दिन अपने जहाजों पर काम करते थे जिससे उनके हाथ गंदे रहते थे इसलिए जब वो सलामी देते थे तो हथेली और जमीन के बीच 90 डिग्री का कोण बनता है। इसलिए वही परंपरा आज भी बनीं हुई है। ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उनके अफसरों को अपमान महसूस न हो।

वायुसेना का कुछ यूं है सलाम

इंडियन एयर फोर्स ने साल 2006 के मार्च माह में अपने कर्मियों के लिए सैल्यूट के नए फॉर्म तय किए। तैयार किए गए नए सैल्यूट फॉर्म के अनुसार वह अब एसे सैल्यूट करते हैं कि हथेली और जमीन से 45 डिग्री का कोण बनता है। इसे आर्मी और नेवी के बीच का सैल्यूट कहा जा सकता है जिससे वो ये इशारा करते हैं कि उनके कदम हमेशा आसमान की तरफ बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा सेना के किसी भी पदाधिकारी के लिए सैल्यूट करने के दौरान बैरेट या कैप पहनना न्यूनतम शिष्टाचार माना जाता है।

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