इस IPS ने सरेआम लगाई थी एक्स MLA की क्लास, यूं बनी ‘लेडी सिंघम’

इस IPS ने सरेआम लगाई थी एक्स MLA की क्लास, यूं बनी ‘लेडी सिंघम’

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आज के इस बदलते दौर में महिलाएं पुरूषो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हैं। चाहे वह मेडिकल क्षेत्र हो इंजीनियरिंग हो या फिर सिविल सर्विस में हो। वर्तमान में लखनऊ में एसएसपी की पोस्ट संभाल रही हैं मंजिल सैनी देहल। Thepolicenews.org आपको इसी दबंग लेडी अफसर की सक्सेस स्टोरी बता रहा हैं

एक्स-MLA के साथ हुई झड़प ने मंजिल को बनाया लेडी सिंघम…
यह वाकया मई 2015 का है। इटावा जनपद के इतिहास में पहली बार किसी महिला आईपीएस को एसएसपी के पद पर भेजा गया था। इटावा रेलवे स्टेशन के पास मंजिल सैनी ने फिरोजाबाद के पूर्व सपा विधायक अजीम भाई की स्कॉर्पियो को चेकिंग के लिए रोका था। चेकिंग के दौरान मंजिल को पूर्व MLA की गाड़ी में एक राइफल बरामद हुई। जब उसने राइफल का लाइसेंस दिखाने को कहा तो विधायक ने जवाब दिया, “यह मेरी नहीं है। मेरे भाई की है।” इतना सुनते ही मंजिल सैनी भड़क गईं। उन्होंने कहा, “मैं चाहूं तो किसी और की राइफल साथ लेकर घूमने के जुर्म में तुम्हें एक मिनट में जेल भिजवा सकती हूं। यह एक जुर्म है।”
एक्स-MLA के साथ इतनी दबंगई से पेश आने के बाद से ही मंजिल सैनी पब्लिक के बीच ‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर हो गईं।

पहला एन्काउंटर
नवंबर 2012 में मंजिल सैनी को जौनपुर में पोस्टिंग मिली। तैनाती के 2 दिन बाद ही मुलायम सिंह यादव के ज्योतिषी रमेश तिवारी की हत्या हो गई। तिवारी को दो बाइक सवार बदमाशों ने गोली से मारकर सनसनी फैला दी थी। मामला चुनौती से भरा था, लेकिन मंजिल के नेतृत्व में यूपी पुलिस ने 3 बदमाशों को गिरफ्तार किया। यही नहीं, खुद मंजिल ने एक आरोपी को एन्काउंटर में मार भी गिराया। 15 नवंबर 2012 को हुए हत्याकांड में पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया था, “रमेश तिवारी के रिश्तेदारों ने ही इस हत्या की साजिश रची थी। उनकी हत्या सुपारी किलर्स से करवाई थी।” मंजिल सैनी ने हत्या के मुख्य आरोपी शूटर शेरू को एन्काउंटर में मार गिराया था।

पहली पोस्टिंग में किडनी रैकेट का भंडाफोड़
आईपीएस मंजिल सैनी को 2008 में मुरादाबाद में एएसपी की तैनाती मिली थी। पोस्टिंग के दौरान मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर उन्होंने 2 लोगों को लड़ाई करते हुए देखा। मंजिल ने तुरंत चौकी इंजार्च को दोनों बदमाशों को कोतवाली लाने के ऑर्डर दे डाले। बदमाशों से पूछताछ के दौरान मंजिल को किडनी रैकेट की भनक लगी। 24 जनवरी, 2008 को उन्होंने हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर गुड़गांव के एक गेस्ट हाउस में रेड डाली। वह गेस्ट हाउस किडनी रैकेट के मुख्य आरोपी अमित कुमार का था।

पुलिस के मुताबिक वह रैकेट 6-7 सालों से चल रहा था। डोनर्स को 30 हजार रुपए का लालच देकर किडनी देने के लिए ललचाया जाता था। पहले युवक-युवतियों को अच्छी जॉब का लालच दिया जाता था। जॉब दिलवाने की फीस के तौर उनसे एक किडनी ली जाती थी। अगर कैंडिडेट फंस गए तो ठीक, लेकिन इनकार करने पर उन्हें जबरदस्ती बेहोश कर किडनी निकाली जाती थी। 9 फरवरी, 2008 को किडनी रैकेट के संचालक डॉ. अमित और डॉ. उपेंदर अग्रवाल को सीबीआई ने नेपाल से गिरफ्तार किया।

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