आगरा पुलिस अब सीखेगी 6 विदेशी भाषाएं

आगरा पुलिस अब सीखेगी 6 विदेशी भाषाएं

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आगरा पुलिसआगरा-उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस को अब अंग्रेजी के अतिरिक्त जर्मन, स्पैनिश, मेंडरिन, कोरियन, पॉर्च्युरीज, जापानी, फेंच और रशियन भाषा भी सीखनी पड़ेगी। ऐसा इसलिए है ताकि ताज की नगरी घूमने आने वाले विदेशी पर्यटकों को वे बेहतर सेवा दे सकें।

राज्य सरकार को भेजा गया है प्रस्ताव

आगरा में हाल के दिनों में स्विस कपल पर हमला हुआ था। उससे सीख लेते हुए स्थानीय पुलिस ने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है। जिसमें उन्होंने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पुलिस वालों को अतिथि सत्कार सिखाने और उनकी कम्यूनिकेशन स्किल अच्छी करने के लिए बजट मांगा है।

आगरा यूनिवर्सिटी कराएगी बेसिक कोर्स

आगरा के एसएसपी अमित पाठक के मुताबिक विदेशी भाषाएं पुलिसवालों को सिखाने के पीछे उद्देश्य यह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को अच्छी सेवा उपलब्ध कराई जा सके। आगरा यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लैंग्वेज पुलिसवालों को बेसिक कोर्स कराएगा। इसमें उन्हें यूरोपियन और एशियन भाषाएं सिखाई जाएंगी।

पर्यटन पुलिस स्टेशन बनाए जाएं

उन्होंने बताया कि आगरा पुलिस की तरफ से प्रस्ताव भेजा गया है कि ताज महल और फतेहपुर सीकरी में दो पर्यटन पुलिस स्टेशन बनाए जाएं। हर एक पुलिस स्टेशन में 69 लोगों को रखा जाए। 4 पुलिस पोस्ट्स बनाए जाएं इन 4 पुलिस पोस् में 16 लोगों को तैनात किया जाए, ये आगरा की 230 स्मारकों की देखरेख करेंगे।

50 फीसदी ज्यादा अलाउंस

जिन पुलिसवालों को इन पर्यटन पुलिस स्टेशन और आउट पोस्ट में तैनात किया जाएगा, उन्हें विदेशी भाषा सिखाई जाएगी। पर्यटन पुलिस ज्वॉइन करने वाले और विदेशी भाषा सीखने वाले पुलिसवाले को उत्साहित करने के लिए उन्हें 50 फीसदी ज्यादा अलाउंस दिया जाएगा।

यूनिफॉर्म होगी अलग

अमित पाठक ने बताया कि ऐसे पुलिसवालों की यूनिफॉर्म भी अलग होगी और उन्हें एटीएस और एसटीएफ की तरह अलग से दस्ता दिया जाएगा। ऐसे पुलिसवालों को सामान्य पुलिस फोर्स के पुलिसवालों की तरह ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। अभी राज्य के पर्यटन पुलिस स्टेशन में मात्र 22 पुलिसवाले ही तैनात हैं। जो ताजमहल में 2007 से तैनात हैं।

कई बार आती है समस्या

कुछ पुलिसकर्मियों के मुताबिक अभी मुट्ठी भर लोग ही इमरजेंसी की घड़ी में अंग्रेजी में बोल सकते हैं बाकी सिर्फ हिंदी ही जानते हैं। समस्या तब ज्यादा आती है जब कई विदेशी पर्यटक अंग्रेजी भी नहीं जानते और वे यूरोपियन और एशियन भाषा बोलते हैं। ऐसी स्थिति में उन लोगों को स्थानीय अनुवादक की सहायता लेनी पड़ती है। साउथ इंडिया से आने वाले पर्यटकों के लिए तो सीआईएसएफ में तैनात साउथ इंडियंस की मदद लेनी पड़ती है।

आगरा शहर में पिछले कुछ दशकों से 114 फीसदी विदेशी पर्यटक बढ़े हैं। उन लोगों को रोज 30,000 पर्यटकों को संभालना पड़ता है। कभी-कभी यह संख्या तीन गुना बढ़ जाती है।

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