1090 महिलाओँ के लिए बना हथियार, जानिए क्या कहते हैं आकड़ें

1090 महिलाओँ के लिए बना हथियार, जानिए क्या कहते हैं आकड़ें

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‘महिला पावर लाइन 1090’ उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए एक सशक्त हथियार के रूप में काम कर रही है। आपको बता दें कि 1090 के आने से यूपी में महिलाओँ के प्रति अपराध काफी रूकावट आई है। वहीं, 1090 की कमान संभालने वाले अधिकारियों का दावा है कि इसका लाभ राज्य की महिलाओं को खूब मिल रहा है।

देखिए क्या कहते हैं आकड़ें
महिला पावर लाइन के अब तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 15 नवंबर, 2012 से लेकर 31 मई, 2016 तक इस पावर लाइन पर कुल 5,44,985 शिकायतें दर्ज हुईं,
जिनमें 5,35,899 शिकायतों का समाधान फौरी तौर पर किया गया है।आंकड़ों के मुताबिक,
15 नवंबर 2012 से लेकर 31 मई 2016 के दौरान 4,95,195 शिकायतें फोन पर परेशान करने और छेड़छाड़ की हैं
जबकि इस दौरान 23,259 सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के उत्पीड़न की घटना सामने आई हैं.
पिछले कुछ महीनों के दौरान सोशल वेबसाइसट्स पर उत्पीड़न की 8,445 शिकायतें आई हैं
इसके अतिरिक्त घरेलू हिंसा की 7,734 शिकायतें महिला पावर लाइन पर दर्ज की गईं।

इन जिलों में सबसे अधिक शिकायतें आईं हैं-
आंकड़ों पर गौर करें तो उप्र के जिन जिलों से सबसे अधिक शिकायतें आई हैं
उसमें लखनऊ सबसे उपर है। इस दौरान लखनऊ में छेड़छाड़ की 1,11,768 शिकायतें दर्ज की गईं।
शिकायत करने वालों में 20,275 कामकाजी महिलाएं व 34,426 गैरकामकाजी महिलाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त 57,067 छात्राओं की शिकायतें महिला पावर लाइन 1090 पर दर्ज की गई हैं।

ये जिले हैं दूसरे स्थान पर और ये सबसे कम
लखनऊ के बाद दूसरा नंबर कानपुर नगर, तीसरे स्थान पर इलाहाबाद, चौथे पर बनारस और पांचवें स्थान पर आगरा है।
सबसे कम शिकायतें जिन जिलों से आई हैं, उनमें श्रावस्ती सबसे ऊपर है।
यहां से उत्पीड़न की सिर्फ 766 शिकायतें ही दर्ज की गई हैं।
दूसरे स्थान पर कासगंज, तीसरे पर चित्रकूट, चौथे स्थान पर ललितपुर व पांचवें स्थान पर कौशांबी हैं।

1 Comment

  1. राम बुझारत

    क्या इन सब जिलो की आबादी एक बराबर है? अगर नहीं तब इनका comparison कैसे किया जा रहा है? यह statistics बिना दिमाग़ लगाए दे दी गयी है।

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